गणेश जी की आरती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत विशेष माना जाता है…
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है — यानी वे हर बाधा और रुकावट को दूर करने वाले देवता हैं।
इसीलिए हर शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही की जाती है…और उनकी आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
आरती केवल एक पूजा नहीं…बल्कि भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा, विश्वास और समर्पण प्रकट करने का माध्यम है।
जब कोई भक्त सच्चे मन से गणेश जी की आरती करता है…तो उसे ईश्वर का आशीर्वाद, शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
नियमित रूप से गणेश आरती करने से…
मन शांत होता है, विचार सकारात्मक बनते हैं…
और जीवन में आत्मविश्वास और सफलता का मार्ग खुलने लगता है।
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा । लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी । कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥




